पित्र पक्ष आज से शुरू 2 सितंबर से शुरू होकर 17 को होंगे खत्म कानपुर न्यूज़ 24

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पित्र पक्ष आज से शुरू 2 सितंबर से शुरू होकर 17 को होंगे खत्म

कानपुर न्यूज़ 24

कानपुर- पितृपक्ष के दौरान दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध किया जाता है शास्त्रों में कहा गया है कि यदि पितर नाराज हो जाए तो व्यक्ति का जीवन भी परेशानियों और तरह तरह की समस्याओं में पड़ जाता है और खुशहाल जीवन खत्म हो जाता है साथ ही घर में भी अशांति फैलती है और व्यापार और गृहस्थी में भी हानि होती है ऐसे में पितरों को तृप्त करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए पितृपक्ष में श्राद्ध करना बेहद आवश्यक माना जाता है श्राद्ध के जरिए पितरों की तृप्ति के लिए भोजन पहुंचाया जाता है और पिंडदान और तर्पण कर उनकी आत्मा की शांति की कामना की जाती है हिंदू पंचांग के अनुसार पितृपक्ष अश्वनी मास के कृष्ण पक्ष में पढ़ते हैं इनकी शुरुआत पूर्णिमा तिथि से होती है और समापन अमावस्या पर होती है हर साल सितंबर के महीने में पित्र पक्ष की की शुरुआत होती है आमतौर पर पितृपक्ष 16 दिनों का होता है इस साल पितृपक्ष 2 सितंबर से शुरू होकर 17 सितंबर को खत्म होगा

क्या है विशेष महत्त्व जाने

हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व माना जाता है हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद मृत व्यक्ति का श्राद्ध किया जाना बहुत जरूरी माना जाता है यदि श्राद्ध ना किया जाए तो मरने वाले व्यक्ति की आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती है वहीं यह भी कहा जाता है कि पितृपक्ष के दौरान पितरों का श्राद्ध करने से वह प्रसन्न हो जाते हैं और उनकी आत्मा को शांति मिलती है पितृपक्ष में यमराज पितरों को अपने परिजनों से मिलने के लिए मुक्त कर देते हैं इस दौरान अगर पितरों का श्राद्ध ना किया जाए तो उनकी आत्मा दुखी व नाराज हो जाती है

पित्र पक्ष में श्राद्ध की तिथियों का चयन किया जाता है जो कि निम्न वत है

जिन परिजनों की अकाल मृत्यु या फिर किसी दुर्घटना या आत्महत्या का मामला है तो उनका श्राद्ध चतुर्दशी के दिन किया जाता है

दिवंगत पिता का श्राद्ध अष्टमी और मां का श्राद्ध नवमी के दिन किया जाता है

जिन पितरों के मरने की तिथि ना मालूम हो उनका श्राद्ध अमावस्या के दिन करना चाहिए

यदि कोई महिला सुहागिन मृत्यु को प्राप्त हुई तो उनका श्राद्ध नवमी को करना चाहिए

सन्यासी का श्राद्ध द्वादशी के दिन किया जाता है

जाने श्राद्ध के नियम- व पूजा विधि

पितृपक्ष के दौरान हर दिन तर्पण किया जाना चाहिए पानी में दूध- जो-चावल और गंगाजल डालकर तर्पण किया जाता है

इस दौरान पिंड दान भी करना चाहिए श्राद्ध कर्म के पके हुए चावल दूध और तिल को मिलाकर पिंड बनाए जाते हैं इनको शरीर के प्रतीक के रूप में देखा जाता है

पित्र पक्ष में कोई भी शुभ कार्य विशेष पूजा पाठ और अनुष्ठान नहीं करना चाहिए हालांकि देवताओं की नित्य पूजा को भी बंद करना चाहिए

इस दौरान रंगीन फूलों का भी इस्तेमाल नहीं किया जाता है

पितर पक्ष में चना-मसूर- बैगन- हींग- शलजम मांस-लहसुन- प्याज और काला नमक भी नहीं खाया जाता है

इस दौरान नए वस्त्र नया भवन गए अन्य कीमती सामान को खरीदने से भी कई लोग परहेज करते हैं

तर्पण और पिंडदान के बाद पुरोहित या किसी ब्राह्मण को भोजन कराएं और दक्षिणा दें

ब्राह्मण को सीधा या सीदा भी दिया जाता है सीधा में चावल- दाल -चीनी -नमक -मसाले -कच्ची सब्जियां -तेल और मौसमी फल शामिल हैं

ब्राह्मण भोज के बाद पितरों को धन्यवाद दें और जाने अनजाने में हुई भूल के लिए माफी मांगे

इसके बाद अपने पूरे परिवार के साथ बैठकर भोजन करें

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